इन कविताओं को प्रकाशित करते समय ईरान और इस्राइल के बीच चल रहा युद्ध अपने नवें दिन में पहुँच गया है. आज जब हम दोनों देशों के बीच मिसाइलों की बारिश और लड़ाकू जहाजों द्वारा बम बरसना देख रहे हैं तो लग रहा है कि युद्ध अपने चरम पर आ गया है किन्तु दोनों देशों का कहना है कि युद्ध अभी कितना ही और ज़्यादा भयानक भी हो सकता है. ओंकार केडिया ने अपनी इन दो छोटी-छोटी कविताओं में एक आम आदमी की बेबसी का ब्यान किया है जो युद्ध की विभीषिका से त्रस्त तो है किन्तु स्वयं को कितना बेबस पाता है.






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