नन्दिता मिश्र हमारी वेब-पत्रिका में बहुत सी कहानियों और लेखों से अपना योगदान दे चुकी हैं. अभी पिछले कुछ माह में आपने उनकी बाबा का मसनद, आखिर क्यूँ, माँ, अंतर्मन का द्वन्द जैसी कई कहानियां पढ़ी होंगी. इस बीच हमें पता चला की नन्दिता जी ने कुछ कविताएँ भी लिखीं हैं तो हमने उनसे कविता भेजने का भी आग्रह किया. प्रस्तुत हैं उनकी दो कविताएँ!











