साहित्य

हमेशा की तरह आज भी प्रासंगिक हैं तुलसीदास

यह माह तुलसी जयंती का माह है. १९ अगस्त को उनकी ५२९वीं जयंती देश भर में तो मनाई ही गई, हार्वर्ड विश्वविद्यालय में एक नौ दिन का कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें प्रसिद्ध कथा वाचक और रामचरितमानस के मर्मज्ञ मोरारी बापू के प्रवचन तो हुए ही, साथ ही विश्व भर से आये विद्वानों ने संत तुलसी दास और मानस पर अपने विचार रखे. समय रहते हमें ओंकार केडिया का यह लेख प्राप्त हुआ है जिसमें उन्होंने बताया है कि तुलसी आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने वह पहले थे.

The Table That Remembered – Lessons from a Slower World

KG Sharma writes on a wide range of subjects for our web magazine. When he is not addressing topical issues, he turns to the world of emotions, offering either a touching story or a satire rich in subtlety. Read the following piece and see how he brings alive the memory of forgotten times.

 

पापा की छोटी : नन्दिता मिश्र की नई कहानी

हमारी वेबपत्रिका की साहित्य केटेगरी को नन्दिता मिश्र ने जीवंत रखा हुआ है। उनकी बहुत सी कहानियां इस वेब-पत्रिका में प्रकाशित हो चुकी हैं और काफी पसंद की गईं हैं । शायद इसलिए भी कि उनकी कहानियां अच्छा-ख़ासा तनाव पैदा करती हैं और फिर आम तौर पर अंत आते-आते उस तनाव से आपको मुक्त भी कर देती हैं। 

सावन का स्वागत - सुभाष सेतिया की कविता

इधर सावन निकला जा रहा है और हमें सुभाष सेतिया की यह कविता प्राप्त हुई है, इसलिए हमें इसे जल्द प्रकाशित कर रहे हैं.  इस पत्रिका के मिजाज से अलग होते हुए भी इसे स्थान दिया जा रहा है क्योंकि यह कविता भारतीय मानसून के सांस्कृतिक और प्राकृतिक आयामों का एक सुन्दर चित्रण है। 

तू ही तू - हिम कण बन विलीन - तू ना था : मनोज पांडे की कविताएँ

मनोज पांडे की यह तीन छोटी छोटी कविताएँ छायावाद की रहस्यवादी परंपरा में सहज रूप से फिट होती हैं। अगर आपकी हिंदी कविताओं में रूचि रही है तो आपको इन कविताओं को पढ़कर तुरंत ही महादेवी वर्मा की रहस्यवादी कविताएँ स्मरण हो आएँगी। पहली ही कविता में तू ही तू था हर जगह / इसलिए कि तू न था” - यह अनुपस्थिति में उपस्थिति का रहस्यवादी भाव है।  अन्य दोनों कविताओं में भी आप अज्ञात, अव्यक्त के प्रति प्रेम और तादात्म्य की आकांक्षा देख सकते हैं।  

 

 

रामत्व अनुभूति : अनीता गोयल की नई कहानी

अनीता गोयल की नई कहानी के बारे में पहले से कुछ कहना पाठकों से साथ अन्याय ही होगा क्योंकि इस कहानी की बुनावट ऐसी है कि इसके बारे में पहले से कुछ कहने से इसका आनंद कम हो सकता है. अपनी ओर से हम केवल यह भरोसा दिलाते हैं कि उनकी यह कहानी भी पाठक को भावनाओं के समुद्र में गोते लगवाती है. यदि आप इस वेब-पत्रिका के नए पाठक हैं तो उनकी पिछली कहानियां पढ़ने के लिए उनके नाम पर क्लिक करें. 

We are trying to create a platform where our readers will find a place to have their say on the subjects ranging from socio-political to culture and society. We do have our own views on politics and society but we expect friends from all shades-from moderate left to moderate right-to join the conversation. However, our only expectation would be that our contributors should have an abiding faith in the Constitution and in its basic tenets like freedom of speech, secularism and equality. We hope that this platform will continue to evolve and will help us understand the challenges of our fast changing times better and our role in these times.

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RaagDelhi: देश, समाज, संस्कृति और कला पर विचारों की संगत

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