साहित्य

नन्दिता मिश्र : चार नई कविताएँ

नंदिता मिश्र की कविताओं में भावनाओं का ज्वार होता है लेकिन वो बहुत वेग से नहीं आता, बहुत धीमे हमारे भीतर कहीं उतरता है. इस बार की उनकी कविताओं में भावनाओं का ज्वार तो है लेकिन यह ऐसा ज्वार है जो बहुत धीमे-धीमे आता है जैसे कोई उसे पीछे से नियंत्रित कर रहा हो! 

9 अप्रैल साहित्य दिवस पर विशेष : सच कहने का जोखिम तो उठाना होगा

आज (9 अप्रैल) को साहित्य दिवस है. राग दिल्ली वेब पत्रिका परिवार के लिए यह खासे संतोष का विषय है कि जयपुर में रह रहे वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार वेदव्यास ने हमें साहित्य दिवस के अवसर पर शब्दों की महत्ता बताते हुए यह लेख भेजा है. लेखक एक तरह से पाठकों का आह्वान करते हैं कि शब्द और साहित्य को समाज के भीतर व्याप्त गैर बराबरी, हिंसा-प्रतिहिंसा और झूठ-सच को उजागर करने में लगाना चाहिए और वर्तमान समाज को भविष्य का नया सपना देना चाहिए। आइये पढ़ते हैं इस सुन्दर लेख को! 

गीतों में नया प्रयोग - नई आशाओं को जगाता डॉ उदय पन्त का गीत

अभी कुछ सप्ताह पहले हमने डॉ उदय पन्त के तीन गीत प्रकाशित किये थे जिन्हें आप यहाँ क्लिक करके देख सकते हैं. आप इस गीत के अंत में उनका परिचय देखेंगे तो देखेंगे कि वह ‘हैप्पीनेस गुरु’ भी हैं. आज यहाँ प्रकाशित हो रहा उनका गीत उनके ‘हैप्पीनेस गुरु’ वाली भूमिका को ही रेखांकित कर रहा है.  इस गीत की एक और ख़ासियत यह है कि इसका हिंदी गीत का सम्पुट सरल इंग्लिश में है जो हर अनुच्छेद के बात आता है - Accept whatever come your way. -  That's the wisdom that's the way!

यह किसने दुनिया को युद्ध में धकेला है : योगेंद्र दत्त शर्मा का गीत

अपना प्रभुत्व बढ़ाने के लालच में अमेरिका द्वारा आरम्भ किया गया यह युद्ध इतना भयावह हो चला है कि इससे सिर्फ ईरान ही नहीं बल्कि किसी ना किसी रूप में दुनिया का हर देश नकारात्मक रूप से प्रभावित हो रहा है. ऐसे में बहुत स्वाभाविक है कि साहित्य और कला जगत के लोग इससे द्रवित होकर कुछ ना कुछ लिखेंगे, रचेंगे! गीतकार, कवि एवं उपन्यासकार योगेन्द्र दत्त शर्मा हमारी वेबपत्रिका में बीच-बीच में अपना योगदान देते ही रहते हैं, इस बार उन्होंने युद्ध के विरुद्ध यह गीत भेजा है जो हम आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. 

होली की मस्ती में - ओंकार केडिया की विवेकपूर्ण क्षणिकाएं

ओंकार केडिया की यह क्षणिकाएं बहुत स्पष्ट हैं और एकदम 'डायरेक्ट हिट' करती हैं. कई दशक पहले जब जापानी काव्य शैली के 'हाइकू' का हिंदी कविता से परिचय हुआ था तो जल्द ही यह हिंदी कविता में भी स्थापित हो गया और इस तरह की शैली को 'क्षणिका' कहा जाने लगा. ओंकार को यह शैली बहुत प्रिय हैं और उन्होंने बहुत सी ऐसी छोटी-छोटी कवितायेँ लिखी हैं जो खूब सारगर्भित होती हैं.

घर जो ना हुआ अपना - नन्दिता मिश्र की नई कहानी

नन्दिता मिश्र हमारी वेब-पत्रिका में बहुत सी कहानियों और लेखों से अपना योगदान दे चुकी हैं. अभी पिछले कुछ सप्ताह पहले आपने उनकी कहानी एक दूसरे से दूर पढ़ी होगी जो काफी पसंद की गई थी. इससे पहले उनकी कई अन्य कहानियां जैसे लाइब्रेरी, बाबा का मसनद, आखिर क्यूँ, माँ, अंतर्मन का द्वन्द आदि भी काफी चर्चित रहीं.

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