सुभाष सेतिया की नई कविताएँ बिल्कुल अलग अलग मूड्स की हैं. ये दोनों कविताएँ बिलकुल अलग होते हुए भी सम्वेदना के स्तर पर कहीं ना कहीं एक ही तरह से झकझोरती हैं. अगर आप उनकी कविताओं में तारतम्यता ढूँढना चाहते हैं तो इस वेब पत्रिका में प्रकाशित उनकी पहले की दो कवितायेँ भी देख सकते हैं.











