नंदिता मिश्र की कविताओं में भावनाओं का ज्वार होता है लेकिन वो बहुत वेग से नहीं आता, बहुत धीमे हमारे भीतर कहीं उतरता है. इस बार की उनकी कविताओं में भावनाओं का ज्वार तो है लेकिन यह ऐसा ज्वार है जो बहुत धीमे-धीमे आता है जैसे कोई उसे पीछे से नियंत्रित कर रहा हो!












