कम नींद लेना ख़राब स्वास्थ्य को बुलावा देना है
"जो सोवत है वो खोवत है, जो जागत है सो पावत है" - इस कहावत को दूर तक ले जाने वालों के लिए आज का लेख एक गंभीर चेतावनी है। हमारे यहाँ स्वास्थ्य सम्बन्धी विषयों पर कई उपयोगी लेख लिख चुकीं डॉ नमिता शर्मा ने इस बार जो लेख हमें भेजा है, वह कम नींद लेने वालों को चेताने के लिए ही है। वह बता रही हैं कि पर्याप्त नींद ना लेने से तमाम तरह के शारीरिक एवं मानसिक दोष उत्पन्न हो सकते हैं। अच्छी नींद कैसे लें, इस पर भी कुछ टिप्स आपको लेख में मिल सकती हैं।
कम नींद लेना ख़राब स्वास्थ्य को बुलावा देना है
डॉ. नमिता शर्मा
नींद आपके स्वास्थ्य के लिए जितना आप सोचते हैं उससे कहीं ज्यादा जरूरी है। आयुर्वेद के नियमों के अनुसार स्वस्थ शरीर के तीन स्तंभों में से नींद एक है। चरक संहिता के श्लोक – ‘कालो भुक्तम जलमं निद्रा हितम सेवेत बुद्धिमान’। बुद्धिमान व्यक्ति को समय पर भोजन, पानी, नींद का सेवन करना चाहिए। 24 घंटे के दिन में औसतन 8 घंटे की नींद हमें लेनी चाहिए। सोने को समय व्यर्थ करना न समझें। शरीर को सुचारु रूप से चलाने के लिए हमें जीवन का एक तिहाई हिस्सा सो कर बिताना चाहिए । सुबह से शरीर लगातार 16 घंटे शारीरिक और मानसिक काम में लगा रहता है। हर क्षण शरीर में कुछ न कुछ प्रक्रिया चलता रहती है। इस दौरान कोशिकाओं, रक्त कण, मांस पेशियों में तोड़-फोड़ होती है। इस तोड़-फोड़ की मरम्मत के लिए शरीर को आराम की जरूरत होती है। सोते समय शरीर के सब काम धीमे हो जाते हैं जैसे : सांस का चलना, दिल का धड़कना, पाचन क्रिया का धीमा हो जाना। इस सब में लगने वाली ऊर्जा सोते समय शरीर की क्षति सुधारने में लग जाती है।
नींद का सीधा संबंध ब्रेन से है। दिन भर आप जो भी लिखते-पढ़ते-सीखते करते हैं वो सब सोने के बाद ही ब्रेन के एक खास हिस्से में जमा होता है। विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के साथ पूरी नींद लेना जरूरी है। ताकि परीक्षा के समय वो पढ़ा हुआ अभ्यास लिख सकें। इसे मेमोरी रिटेंशन (memory retention) या मेमोरी कन्सॉलिडेशन (memory consolidation) कहते हैं। किसी भी सीखी हुई जानकारी को लंबे समय तक सहेज कर रखने की प्रक्रिया में नींद का बड़ा हाथ होता है। पर्याप्त नींद नहीं होने से याददाश्त कमजोर हो सकती है।
ब्रेन का एक भाग अमिगडाला (Amygdala), जिसका संबंध भावनाओं से जुड़ा है, कम नींद से उत्तेजित हो जाता है। यही कारण है कि नींद पूरी नहीं होने पर चिड़चिड़ापन, उत्तेजना, गुस्सा बढ़ जाता है। कम नींद से ध्यान, काम की बारीकी, एकाग्रता, स्मृति और समझ पर असर पड़ता है जिसका सीधा असर आपके काम पर पड़ता है। कम नींद से 3 से 10 सेकंड की झपकी भी अपघात याने किसी दुर्घटना या अप्रिय स्थिति का कारण बन जाती है। सड़कों पर, कारखानों में अधिकतर अपघात का कारण कम नींद है। लगातार 17 घंटे काम करते रहने के बाद दिमाग की हालत रक्त में 5 प्रतिशत अल्कोहल की मात्रा होने पर जैसी होती है, वैसी हो जाती है। कम नींद के कारण TYPOS यानी लेखन या टाइपिंग में सही जानकारी के बाद भी गलत स्पेलिंग, मात्रा या शब्दों का लिखना बढ़ जाता है। ऑफिस के कामों में बाधा आ सकती है। इस से काम की गुणवत्ता और उत्पादकता दोनों पर असर पड़ता है।
शरीर के ग्रोथ हार्मोन नींद में बढ़ते हैं। मानसिक व शारीरिक विकास के लिए ठीक नींद जरूरी है। नवजात शिशु की 16-18 घंटे की नींद उसके विकास के लिए जरूरी है। मेल हार्मोन टेस्टेस्टरोन की कमी का एक कारण कम नींद होता है। कम नींद कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ाता है और इंसुलिन कम करता है। साइटोनिक प्रोटीन का एक प्रकार है जो बाहर के संक्रमणों से शरीर की रक्षा करता है, प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है। नींद में यह प्रक्रिया बढ़ती है। यही कारण है 6 घंटे से कम नींद वाले लोगों को साइटोनिक की कमी के कारण जल्दी सर्दी, खांसी, संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है।
कम नींद से भूख लगने का हार्मोन घ्रेलिन (ghrelin) ज्यादा मात्रा में बनता है। ज्यादा भोजन मतलब ज्यादा वजन, मोटापा होना। मोटापा अपने आप में कई बीमारियों का कारण है। कम नींद से लेप्टिन (Leptin) हार्मोन कम होता है। लेप्टिन पेट भरे रहने का एहसास देता है। कम लेप्टिन से लगातार पेट खाली होने का एहसास बना रहता है। इस वजह से जंक फूड, छुटपुट खाते रहने का मन होता रहता है। यह मोटापे का बड़ा कारण है। कम नींद कार्टिसोल हार्मोन बढ़ाती है। ज्यादा कार्टिसोल स्ट्रेस एंग्जायटी का मुख्य कारण है। बढ़ा कार्टिसोल रक्त की इंसुलिन क्षमता कम कर डायबिटीज की संभावना को बढ़ाता है।
नींद में मस्तिष्क के कुछ टोक्सिन जैसे बीटा अमीलेड हटाए जाते हैं जो एल्जाइमर बीमारी का कारण होते हैं। नींद में कोलेजन फाइबर बनता है जो त्वचा को तना हुआ रखने में, झुर्रियां कम करने का काम करता है। आजकल सौंदर्य उपचारों में नींद का बड़ा योगदान होता जा रहा है। जगह-जगह ब्यूटी पार्लर के साथ नैप स्टूडियो, स्लीप स्टूडियो दिखेंगे। नींद त्वचा के रक्त संचार को बढ़ा कर सूर्य की यूवी किरणों से होने वाली क्षति को ठीक करता है। प्रकृति के काम सरल और सटीक हैं। नींद के लिए ब्रेन का हार्मोंमेलाटोनिन काम करता है। अंधेरे और वातावरण के 18 से 22 डिग्री C तापमान पर मेलोटोनिन सक्रिय हो कर नींद की प्रक्रिया शुरू करता है। सूर्य अस्त होता है। रौशनी, वातावरण का तापमान कम हो जाता है, मेलाटोनिन बढ़ता है और नींद आने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। सबेरे सूर्य उदय के साथ उजाला, तापमान का बढ़ना इस हार्मोन को कम कर शरीर में फुर्ती का संचार करता है। कैसा अद्भुत तालमेल है शरीर का प्रकृति से!
हमारी जरूरतें, मजबूरियां, लापरवाही इस चक्र को तोड़ कर नींद कम कर हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है। चाहें तो हम काम के साथ, जीवन शैली को संभाल कर अपनी नींद पूरी कर सकते हैं। स्वास्थ्य ही सब कामों को सिद्ध करने का साधन है और नींद उसका मूल है। ये सुभाषित आयुर्वेद शास्त्र से है। प्राचीन काल से ही नींद के महत्व का ज्ञान है हमें। नई पीढ़ी को इसे समझना होगा। कम नींद, नींद न आने की समस्या बढ़ती जा रही है। लगातार कम नींद की आदत शरीर को तो हो जाती है, पर कम नींद से ब्रेन पर धीरे-धीरे बुरा असर होता रहता है।
कम नींद से थकान, सिरदर्द, सुस्ती, कम ध्यान, एकाग्रता की कमी हो सकती है। लंबे समय तक 6 घंटे से कम की नींद से विद्यार्थी और बच्चों में मोटापा, मूड स्विंग, चिड़चिड़ाहट, एकाग्रता की कमी हो जाती है। नवयुवकों में कम नींद मोटापा, डायबिटीज, कम उम्र में ब्लड प्रेशर, ह्रदय रोग, एंग्जायटी, डिप्रेशन का कारण बन सकती है। बच्चों में, नवयुवकों में दिन पर दिन मानसिक रोग बढ़ रहे हैं।
समय पर सोने और समय पर उठने की कोशिश करें। सोने पहले फोन, कम्प्यूटर, ब्लू स्क्रीन से बचें। आप का दिमाग सूरज की किरणों से चैतन्य हो जाता है। फोन स्क्रीन की कृत्रिम ब्लू लाइट तो मेलाटोनिन को बहुत ही कम कर आप की नींद को आंखों से कोसों दूर ले जाएगी। कॉफी का सेवन शाम के बाद न करें। कॉफी का असर रक्त में 5 से 7 घंटे तक रहता है। व्यस्तता के बीच समय निकाल कर 30 मिनट से 90 मिनट भी सो पाएं तो दिमाग को आराम मिलता है। बड़ी कंपनियों जैसे नासा, गूगल में नैप रूम्स हैं जहां अधिकारी, कर्मचारी बीच में जा कर कुछ 30 मिनट से 90 मिनट की नींद ले सकते हैं। इससे उनके काम करने की क्षमता, ठीक निर्णय ले कर समाधान करने की क्षमता बढ़ती है।
नींद को आलस, भोग-विलास से न जोड़ें। नींद हमारे शरीर के लिए हवा, पानी, भोजन जितनी जरूरी है। सोना, नींद सबसे बड़ा सुख है जिसके पास कम है वो इसे समझ सकता है। ̒अर्ली टू बैड, अर्ली टू राइज, मेक्स मैन हेल्दी वेल्दी एंड वाइज।’ आज बिना फोन, स्क्रीन के जल्दी सोने की कोशिश कर के देखें। शायद धीरे-धीरे आप की हर सुबह रोज होने वाली सुबह से कुछ बेहतर हो। फिर आप भी कह सकेंगे हम तो चैन की नींद सोते हैं।
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डॉ नमिता शर्मा पेशे से चिकित्सक हैं। 25 वर्ष तक कैंटोनमेंट बोर्ड, पुणे में बतौर मेडिकल ऑफिसर काम किया। अवकाश -प्राप्ति के बाद कुछ समय तक विभिन्न सामाजिक कार्यों से जुड़ी रहीं। पिछले लगभग पाँच वर्ष से रामकृष्ण मठ (पुणे) से संबद्ध एक चैरिटेबल अस्पताल में चिकित्सीय सेवाएँ दे रही हैं और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर पढ़ती-लिखती और गुनती रहती हैं।