समाज-एवं-राजनीति

स्वतंत्रता दिवस पर विशेष : आज़ादी का दिन और गांधी

जब भी हम प्रथम स्वतंत्रता दिवस (1947) की बात करते हैं तो लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए पंडित जवाहर लाल नेहरु की सायास ही याद आ जाती है। साथ ही मन में प्रश्न उठता है कि उस दिन महात्मा गाँधी कहाँ थे और क्या कर रहे थे? यह तो मोटे तौर पर हम सब जानते हैं कि गाँधी उन दिनों देश के विभाजन से उपजी साम्प्रदायिक हिंसा की आग को बुझाने के काम में लगे थे।

भवानी भाई और बैतूल के बच्चों का तिरंगा

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर हम अपनी वेब-पत्रिका के पाठकों के लिए यह विशेष संस्मरण लेकर आए हैं जिसे सुप्रसिद्ध कवि एवं लेखक शरद कोकास (इनका पूरा परिचय नीचे देखें) ने लिखा है।  संस्मरण के केंद्र में प्रख्यात गांधीवादी चिन्तक एवं नामी कवि भवानी प्रसाद मिश्र के साथ-साथ जगमोहन कोकास भी हैं जिन्होंने ग्यारह वर्ष की आयु में ही यूनियन जैक उतारकर तिरंगा लहरा दिया था। 

 

भारत छोड़ो आंदोलन: आज़ादी के लिए जनक्रांति और इसके कुछ रोचक पहलू

आज 9 अगस्त है अर्थात भारत छोड़ो आन्दोलन के प्रारंभ होने की वर्षगांठ! डॉ शैलेश शुक्ला अपने लेख में इस महत्वपूर्ण  तथ्य की ओर ध्यान आकृष्ट किया है कि आधुनिक भारत के इतिहास का यह पहला और शायद एकमात्र ऐसा आन्दोलन है जिसे देश की आम जनता ने (जिसमें हर वर्ग, जाति और धर्म के लोग शामिल थे) आन्दोलन के पहले ही दिन अपने शीर्ष नेतृत्व के गिरफ्तार हो जाने के बाद केवल अपनी अदम्य संकल्पशक्ति के दम पर संचालित किया था।

बात निकली है तो दूर तलक जाएगी: जेन-ज़ी ने बदल दिया राजनीति का नैरेटिव

राजकेश्वर सिंह ने हाल ही में जब अपना पिछला लेख लिखा तो उसके बाद शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा भी आ गया और इसके अलावा उन्हें जैसे महसूस हुआ कि जैसे उन्हें अपने पिछले लेख में कुछ जोड़ना भी था. आज के लेख में वह बता रहे हैं कि अब यह प्रक्रिया जो चल निकली है, वह रुकने वाली नहीं है बल्कि जेन-ज़ी से जुड़े मुद्दों पर सवाल और जवाब का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।   

The Education Minister has resigned, so what?

In this strong, uncompromising piece, Manoj Pandey, a former member of the Staff Selection Commission, (SSC) asserts that the resignation of a minister is symbolic, but the rot in the examination system runs much deeper. He argues that resignation will not help reform in the system as the mafia of exam malpractices remains untouched.

सत्ता और विपक्ष दोनों चूके जेन-ज़ी का मन पढ़ने में

 कॉकरोच जनता पार्टी  द्वारा शुरू किया गया छात्रों और युवाओं का यह आन्दोलन आगे चलकर क्या रूप लेने वाला है, अभी किसी के लिए भी कुछ कहना कठिन है. वरिष्ठ पत्रकार राजकेश्वर सिंह जो राजनीति की नब्ज़ दशकों से जांच रहे हैं, इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी टिप्पणी दे रहे हैं. 

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RaagDelhi: देश, समाज, संस्कृति और कला पर विचारों की संगत

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