अध्यात्म-एवं-दर्शन

कारणकूट: मैं से हम तक की यात्रा का विश्लेषण

डॉ मधु कपूर हमारी वेब पत्रिका के लिए पिछले काफी समय से दार्शनिक विषयों पर लिख रही हैं. उन्होंने गूढ़ दार्शनिक विषयों को हमारे लिए आसान बनाया है. आप यदि हमारे नए पाठक हैं तो हम आपको आमंत्रित करते हैं कि आप उनके नाम पर क्लिक करके उनके पुराने लेख भी देखिये और दर्शनशास्त्र को स्वयं के लिए सुबोधगम्य बनाइये. 

स्वधर्म और निष्काम भाव: सहजता का दर्शन

दर्शनशास्त्र के निबंधों की श्रृंखला में डॉ मधु कपूर का पिछला लेख कर्म और क्रियाओं के विभिन्न अंतर्संबंधों के बारे में था। आज के लेख से वही बात आगे बढ़ रही है और डॉ कपूर बताती हैं कि व्याकरण की दृष्टि से जो कर्म मात्र एक क्रिया  है, दर्शन की दृष्टि से वही कर्म मन  की मुक्ति का मार्ग खोल देता है। लेख में निष्काम कर्म क्या है और भारतीय दर्शन में कर्म को कैसे देखा और समझा जाता है, जैसे सवालों को भी डील किया गया है। हमारा मशवरा मानकर पढ़िए इस लेख को, अच्छा रहेगा।

कर्म का अनंत आकाश और क्रिया की अपरिमित उड़ान :ऐच्छिक और अनैच्छिक क्रियाओं का दर्शन

हमारे अधिकांश पाठकों ने स्कूल के वर्षों में ऐच्छिक और अनैच्छिक क्रियाओं के बारे में और सकर्मक और अकर्मक क्रियाओं के बारे में पढ़ा होगा।  अपने दार्शनिक लेखों की श्रृंखला में डॉ मधु कपूर हमें फिर एक बार इन क्रियाओं और क्रिया पदों की ओर ले जा रहीं हैं लेकिन हर बार की तरह आप उनका यह लेख पढ़ने के बाद भी दर्शनशास्त्र के एक और छोटे से क्षेत्र में स्वयं को सशक्त अनुभव करेंगे।
  

As many faiths, so many paths: Are We Forgetting Our Spiritual Heritage?

In this thoughtful essay, Tish Malhotra reflects on the life and teachings of Sri Ramakrishna, reminding us of India’s rich spiritual heritage. The piece highlights Ramakrishna’s message of religious harmony — that all faiths are valid paths to the same divine truth. At a time when intolerance and division seem to dominate, the essay calls us to remember the importance of respect, fellowship, and unity in diversity. It echoes the belief that true peace can only come when we honour every path to God.
Are We Forgetting Our Spiritual Heritage?

राग और विराग की अभिसंधि: एक आध्यात्मिक विमर्श

डॉ मधु कपूर के दर्शनशास्त्र के निबंधों में हमें अचानक ही ऐसे सवालों के उत्तर मिल जाते हैं जिन्हें हम कब से खोज रहे होते हैं। उदाहरण के लिए इस बार हमें इस प्रश्न का उत्तर मिला कि आध्यात्मिकता क्या होती है? यह कहना तो सही नहीं होगा कि हमें इस प्रश्न का उत्तर अभी तक मालूम नहीं था लेकिन यह कहना होगा कि जो उत्तर आज पता चला है, उससे काफी स्पष्टता बढ़ गई है। 

भारतीय आध्यात्मिक चेतना में भक्ति: जीवन की समग्रता में स्वीकृति

हमारे पाठकों के लिए दर्शन-शास्त्र की विभिन्न गुत्थियों को सुलझा रहीं डॉ मधु कपूर के दार्शनिक लेखों की अनवरत चल रही श्रृंखला में आप इस बार 'भक्ति' के अलग-अलग आयामों के बारे में पढ़ेगे।  यह लेख भक्ति और दर्शन के उस गहरे अंतर्संबंध को रेखांकित करता है और स्वयं डॉ मधु कपूर के अनुसार उन्होंने यह प्रयास किया है कि दर्शन की शुष्कता और भक्ति की तरलता के बीच उस सेतु की तलाश करें जहाँ जीवन अपनी समग्रता में खिलता है। 

We are trying to create a platform where our readers will find a place to have their say on the subjects ranging from socio-political to culture and society. We do have our own views on politics and society but we expect friends from all shades-from moderate left to moderate right-to join the conversation. However, our only expectation would be that our contributors should have an abiding faith in the Constitution and in its basic tenets like freedom of speech, secularism and equality. We hope that this platform will continue to evolve and will help us understand the challenges of our fast changing times better and our role in these times.

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RaagDelhi: देश, समाज, संस्कृति और कला पर विचारों की संगत

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