डॉ. मधु कपूर की सम्बन्धों पर चल रही दार्शनिक श्रृंखला का यह चौथा लेख है। अपने पिछले लेख में उन्होंने स्व और स्वामित्व के बीच सम्बन्ध पर चर्चा की थी और कि बताया था कि स्वामित्व की सीमाएँ कहाँ तक जाती हैं. आज के लेख में वह भारतीय दर्शन में, विशेषकर वेदांत में उल्लिखित 'तादात्म्य सम्बन्ध' पर चर्चा कर रही हैं.










