महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व पूर्ण समग्रता में किया था। महिलाओं और दलितों को स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदार बनाने के अलावा वह अन्तर्जातीय विवाहों के बहुत बड़े हिमायती थे। उनका मानना था कि अन्तर्जातीय विवाहों के बिना जाति-भेद मिटाना बहुत मुश्किल काम है। हालांकि हमारे देश के मानस पर जातीय शिकंजा इतना कसा हुआ है कि बहुसंख्यक जनता इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखती है और अभी तक भी अन्तर्जातीय विवाह कोई सामान्य घटना नहीं होते बल्कि कभी-कभी तो उनके चलते 'ऑनर किलिंग' जैसे अपराध होते देखे गए हैं। फिर भी सत्येन्द्र प्रकाश ने कथा कहने की अपनी अनूठी शैली का प्रयोग करते हुए इस संवेदनशील मुद्दे पर कितनी सहजता से अपनी बात कही है, वह देखते ही बनता है।

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