इसी माह हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष पूरे होने पर डॉ. शैलेश शुक्ला वर्तमान में पत्रकारिता के परिदृश्य पर और इसके विभिन्न आयामों पर हमारी इस वेब पत्रिका में लेख लिख रहे हैं। आज का लेख श्रृंखला का तीसरा लेख है जिसमें आपको कुछ बातें तो ऐसी मिलेंगी जो आप पिछले दो लेखों में पढ़ चुके होंगे लेकिन सन्दर्भ अधूरे ना रहें, शायद इसीलिए लेखक ने उन्हें दोहराया होगा। आज के लेख में आप पेड न्यूज, 1990 से शुरू हुए उदारीकरण का पत्रकारिता पर प्रभाव और नई परिस्थितियों में संपादक की बदलती भूमिका जैसे बिंदुओं के बारे में पढ़ेंगे.












