इस वेबपत्रिका में कुछ ही माह पहले योगेन्द्र दत्त शर्मा की कविताएँ प्रकाशित हुईं थीं जो सभी खूब पसंद की गईं थी हालाँकि उनमें से भी "चक्र घूमेगा कभी" विशेष रूप से सराही गई थी. आज वसंत पंचमी और सरस्वती पूजन के अवसर पर हमें उनकी यह कविता प्राप्त हुई है जिसमें उन्होंने माँ सरस्वती से अद्भुत प्रार्थनाएं की हैं - ऐसी प्रार्थनाएं जो आज हर प्रबुद्ध व्यक्ति की प्रार्थना हो सकती है.











