अगर आप मोहन राणा की इस कविता की आरम्भिक 'दुरूहता' को आत्मसात कर आगे बढ़ते हैं तो आपको जल्द ही ग़ज़ब के प्रयोग करती ऐसी कविता मिलेगी जिसमें प्रयुक्त बिम्ब और प्रतीक आपको चकित कर देंगे। ना केवल यह कि यह बिम्ब और प्रतीक बिल्कुल नई तरह के हैं बल्कि इनके माध्यम से कविता को जो गहराई और व्यापकता मिल रही है, वह भी अनूठी है।











