नन्दिता मिश्र भावप्रवण कहानियां लिखती हैं। उनकी कहानियों में घटनाएं गति से घटती जाती हैं जैसे उन्हें बहुत सी बातें कहनी हों और समय कुछ कम हो! कभी-कभी लगता है कि उनकी कहानी में कई और कहानियों के भी सूत्र छिपे हैं जिनका इस्तेमाल वह नई कहानियां लिखने में करेंगी। यह कहानी काफी बरस पहले लिखी रह गई थी और तभी इस कहानी में कुछ पुराना फ्लेवर भी है जो पुराने चावल की तरह इस कहानी को महका रहा है।












