नन्दिता मिश्र की इस कहानी के बारे में आप कह सकते हैं कि इसमें कोई ख़ास घटना तो है ही नहीं। पुरुष मित्रों के साथ एक गप्प-शप्प कह सकते हैं आप, लेकिन ऐसी रोचक गप्प-शप्प जिसके बीच आप उठ नहीं सकते! शुद्धतावादी कह सकते हैं कि इसमें महिला का चित्रण पुरुषवादी दृष्टिकोण से है किन्तु वह बात दूर की कौड़ी होगी। अभी तो आप इस रोचक कहानी को पढ़िए जिसमें कोई घटना ना होते हुए भी समकालीन समाज पर एक गंभीर टिप्पणी है।











