पर्युषण जैन परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक उत्सव है, जो आत्मशुद्धि और संयम का अभ्यास कराता है। इसमें उपवास, सामायिक, प्रतिक्रमण, प्रत्याख्यान जैसे साधन किए जाते हैं ताकि मनुष्य अपने भीतर झाँक सके और कषायों (क्रोध, मान, मोह, लोभ) का क्षय कर सके। इसमें उपवास, सामायिक, प्रतिक्रमण, प्रत्याख्यान जैसे साधन किए जाते हैं ताकि मनुष्य अपने भीतर झाँक सके और कषायों (क्रोध, मान, मोह, लोभ) का क्षय कर सके।










