डॉ मधु कपूर के लेख "स्वप्न: चेतना का विस्तार और अचेतन की प्रतिध्वनि" से उनकी स्वप्न श्रृंखला की शुरुआत हुई थी. इस विषय पर आज अपने पाँचवें लेख से वह इस श्रृंखला का अंत कर रही हैं. आज के लेख में वह प्रसिद्ध अमेरिकी दार्शनिक नॉर्मन मैल्कम की स्वप्न सम्बन्धी प्रस्थापनाओं से पाठकों का परिचय करा रही हैं.











