अध्यात्म-एवं-दर्शन

चित्त की तरंगें - काल का भ्रम - गाधि का महास्वप्न

डॉ. मधु कपूर की स्वप्न‑श्रृंखला का यह दूसरा लेख पाठक को एक गहन दार्शनिक यात्रा पर ले जाता है और  स्वप्न, काल और चेतना के रहस्यमय संबंधों को उद्घाटित करता है। लेख में स्वप्न और जाग्रत अवस्थाओं के बीच की सूक्ष्म सीमाओं को माण्डूक्य उपनिषद की दृष्टि से समझाया गया है। 

The Grave of Attention: Reflections by Frank Noronha

We are pleased to introduce Frank Noronha, former senior civil servant, who has written his first piece for our web magazine. As readers will see, this reflective essay is vivid, thoughtful, and psychologically perceptive. Those who know Frank personally will agree that he has long been a spiritually inclined and reflective person — qualities not often associated with government service. The piece takes the reader through some of the most familiar modern anxieties around relevance, validation, and identity. We hope this is the first of many contributions from Frank Noronha. 

स्वप्न: चेतना का विस्तार और अचेतन की प्रतिध्वनि

दर्शनशास्त्र की विश्वविद्यालयी या अकादमिक पढ़ाई में हमें पता नहीं कि 'योग वशिष्ठ' नामक ग्रन्थ का ज़िक्र आता है या नहीं किन्तु बहुत वर्ष पहले हमने जब कहीं सुना कि यह बहुत उच्च कोटि का धार्मिक ग्रन्थ है जिसमें कई महत्वपूर्ण प्रस्थापनाएं की गईं हैं तो हमने भी शौक-शौक में इसे ले लिया. योग वशिष्ठ की याद आई जिसमें कई प्रसंगों में संसार को एक जाग्रत स्वप्न के रूप में समझाया गया है। अब डॉ मधु कपूर इस किश्ती को किस तरफ ले जाएँगी, यह कहना तो अभी मुश्किल है लेकिन स्वप्न-श्रृंखला का पहला निबंध आपके लिए प्रस्तुत हैं. पत्रिका से जुड़ रहे नए पाठकों को बता दें कि यदि उन्हें दर्शनशास्त्र में रूचि है तो डॉ मधु कपूर के नाम पर क्लिक करके उनके सभी निबंध एक साथ देख सकते हैं. 

हम बनाम वह: सभ्यता के प्रतिमान और युद्ध की आदिम वृत्ति

दर्शनशास्त्र से अर्जित अपने ज्ञान को आधार बनाते हुए डॉ मधु कपूर ने अपने इस लेख में 'युद्ध क्यों होता है', इस प्रश्न  को डील करते हुए हमें अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं. यह लेख कई मूलभूत मुद्दों की तरफ हमारा ध्यान आकर्षित करता है और पाठकों को और अधिक जानने की इच्छा होती है. उदाहरण के लिए  लेख के अंत में Thanatos (the death drive) के सिद्धांत के बारे में बताया गया है जो डोनाल्ड ट्रम्प की पूरी सभ्यता को समाप्त करने की पाशविक धमकी से जुड़ता है. यह लेख निश्चय ही पढ़ा जाना चाहिए क्योंकि आप थोड़ी और खोजबीन करें तो इसमें आप आने वाले युग की आहट भी सुन सकते हैं.   

 

कारणकूट: मैं से हम तक की यात्रा का विश्लेषण

डॉ मधु कपूर हमारी वेब पत्रिका के लिए पिछले काफी समय से दार्शनिक विषयों पर लिख रही हैं. उन्होंने गूढ़ दार्शनिक विषयों को हमारे लिए आसान बनाया है. आप यदि हमारे नए पाठक हैं तो हम आपको आमंत्रित करते हैं कि आप उनके नाम पर क्लिक करके उनके पुराने लेख भी देखिये और दर्शनशास्त्र को स्वयं के लिए सुबोधगम्य बनाइये. 

स्वधर्म और निष्काम भाव: सहजता का दर्शन

दर्शनशास्त्र के निबंधों की श्रृंखला में डॉ मधु कपूर का पिछला लेख कर्म और क्रियाओं के विभिन्न अंतर्संबंधों के बारे में था। आज के लेख से वही बात आगे बढ़ रही है और डॉ कपूर बताती हैं कि व्याकरण की दृष्टि से जो कर्म मात्र एक क्रिया  है, दर्शन की दृष्टि से वही कर्म मन  की मुक्ति का मार्ग खोल देता है। लेख में निष्काम कर्म क्या है और भारतीय दर्शन में कर्म को कैसे देखा और समझा जाता है, जैसे सवालों को भी डील किया गया है। हमारा मशवरा मानकर पढ़िए इस लेख को, अच्छा रहेगा।

We are trying to create a platform where our readers will find a place to have their say on the subjects ranging from socio-political to culture and society. We do have our own views on politics and society but we expect friends from all shades-from moderate left to moderate right-to join the conversation. However, our only expectation would be that our contributors should have an abiding faith in the Constitution and in its basic tenets like freedom of speech, secularism and equality. We hope that this platform will continue to evolve and will help us understand the challenges of our fast changing times better and our role in these times.

About us | Privacy Policy | Legal Disclaimer | Contact us | Advertise with us

Copyright © All Rights Reserved With

RaagDelhi: देश, समाज, संस्कृति और कला पर विचारों की संगत

Best viewed in 1366*768 screen resolution
Designed & Developed by Mediabharti Web Solutions