सुभाष सेतिया की दो कविताएँ आप इस वेब-पत्रिका में पढ़ चुके हैं. इसी बीच हमने उनसे अनुरोध किया कि वह हमें अपने लेख भी भेजें तो उन्होंने भारतीय चिंतन की अलग-अलग धाराओं से परिचित कराते हुए यह लेख भेजा है जिसमें भारतीय दर्शन की परम्पराओं का एक सरलीकृत विवरण मिल जाता है. वैसे हमारे बहुत से पाठक डॉ मधु कपूर के दार्शनिक लेखों की श्रृंखला पिछले काफी समय से पढ़ रहे हैं लेकिन नए जुड़ रहे पाठकों के लिए सुभाष सेतिया का यह लेख विशेष रूप से उपयोगी रहेगा.











