ऐसा लगता है कि इस वेब-पत्रिका के लिए ढेर सारी निबंधात्मक कहानियाँ लिख चुके सत्येन्द्र प्रकाश अब कुछ नए साहित्यिक प्रयोग करना चाहते हैं। बच्चों का विदेश जाकर बस जाना और पीछे वृद्ध माता पिता का रहा जाना आज महानगरों में आम हो चला है। उच्च मध्यम वर्ग की इस शहरी प्रवृत्ति को गाँव से आया युवक कैसे देखता है, इस कहानी में रोचक ढंग से यह बताया गया है।




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