ट्रेन यात्रा के दौरान विभिन्न दृश्यों को देखते हुए मन में आ रहे विचारों में समुदाय-समाज और राष्ट्र कैसे आ जाते हैं, कितनी सहजता से राजेश झा अपनी बात कहते जाते हैं, यह देखना तो तो नीचे के इस यात्रा-वृत्तान्त को पढना शुरू कीजिये, अंत तक कब पहुंचे, यह पता भी नहीं चलेगा.












