प्रसिद्ध पर्यावरणविद और गाँधीवादी चिन्तक अनुपम मिश्र ने 2004 में यह लेख लिखा था, जब देश सूखे की आशंकाओं से जूझ रहा था और देश के कई हिस्सों से किसानों द्वारा आत्महत्याओं की ख़बरें आ रहीं थीं। इस लेख में अनुपम केवल पानी और खेती की कठिनाइयों का ही नहीं, बल्कि नेतृत्व और नीतियों की कमी को भी उजागर करते हैं।











