डॉ. शैलेश शुक्ला द्वारा लिखी गई यह समीक्षा प्रो.हरीश अरोड़ा की हाल ही में प्रकाशित कृति "शोध : प्रविधि और प्रक्रिया" पर केंद्रित है. डॉ. शुक्ला का यह कहना है कि यह हिन्दी शोध-जगत की पद्धतिगत चुनौतियों और उनके समाधान की ओर गहन दृष्टि डालती है। डॉ. शुक्ला ने पुस्तक की संरचना, उसके व्यावहारिक योगदान और शोधार्थियों व निर्देशकों के लिए इसकी उपयोगिता को सूक्ष्मता से रेखांकित किया है। यह लेख हिन्दी शोध की गंभीरता और उसके नैतिक अनुशासन पर पुनः विचार करने का आमंत्रण है।





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