विश्व भर में ही लोकतान्त्रिक मूल्य संकट में हैं। भारत में 1975 में लगे आपातकाल के बाद पिछले कुछ वर्षों में ऐसी स्थिति आई है कि देश के प्रबुद्ध लोग सिहरकर आपातकाल को याद कर रहे हैं और 'अघोषित आपातकाल' की चर्चा कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में लोकतंत्र विमर्श चलते रहना अत्यंत आवश्यक है।












