डॉ मधु कपूर के दर्शनशास्त्र के बहुत सारे लेख हम प्रकाशित कर चुके हैं किन्तु हर बार के लेख में हमें लगता है कि उसमें जानने को कितना कुछ नया मिल गया.आज का लेख भी ऐसा ही है। वैधता और सत्य के बीच के अंतर्संबंधों को टटोलता यह लेख हमें दर्शनशास्त्र के अनजान क्षेत्रों में भी भ्रमण करवाता है और तभी हमें यह भी पढने को मिलता है, "कई बार आधार वाक्य और निष्कर्ष दोनों ही सत्य होते है, पर युक्ति अवैध होती है।" पूरे माजरे को समझने के लिए आप यह लेख पढ़ें।











