यह लेख विशेष आग्रह के साथ मंगाया गया है कि हमारे अध्यात्म के कॉलम में धर्म और राजनीति के प्रश्न पर दक्षिणपंथी मत भी आ सके। हालांकि लेखक ने वर्णाश्रम को जन्म के आधार पर नहीं बल्कि कर्म और संस्कारों के आधार पर बताकर हिन्दू धर्म में हमेशा चलने वाली प्रगतिशील धारा का ही प्रतिनिधित्व किया है।








