दर्शनशास्त्र के निबंधों की श्रृंखला में डॉ मधु कपूर का पिछला लेख कर्म और क्रियाओं के विभिन्न अंतर्संबंधों के बारे में था। आज के लेख से वही बात आगे बढ़ रही है और डॉ कपूर बताती हैं कि व्याकरण की दृष्टि से जो कर्म मात्र एक क्रिया है, दर्शन की दृष्टि से वही कर्म मन की मुक्ति का मार्ग खोल देता है। लेख में निष्काम कर्म क्या है और भारतीय दर्शन में कर्म को कैसे देखा और समझा जाता है, जैसे सवालों को भी डील किया गया है। हमारा मशवरा मानकर पढ़िए इस लेख को, अच्छा रहेगा।











