डॉ मधु कपूर की 'ज्ञान' के विभिन्न आयामों पर चल रही श्रृंखला में हाल ही में आपने "‘सत्य' अब एक बहस का विषय है" और उससे पहले "संदेह की टटोलन, ज्ञान की सीमा और विश्वास का धरातल" जैसे लेख पढ़े होंगे. इसके पहले भी विभिन्न लेखों में वह ज्ञान और सत्य पर दर्शनशास्त्र के विभिन्न सिद्धांतों के अनुसार चर्चा कर चुकी हैं. यदि पुराने लेखों का का स्मरण करें तो इस सन्दर्भ में उनका करीब पौने दो वर्ष पहले इसी वेबपत्रिका में प्रकाशित "मैं कहता आँखिन देखी" भी बहुत महत्वपूर्ण है.











