एचएमटी किडज़ (KIDZ) ऑफ इंडिया
देश में 1989 के आम चुनावों से भारतीय राजनीति को एक नई दिशा मिली थी। 1977 की गैर-कांग्रेसी सरकार आपातकालीन स्थिति की विशेष परिस्थिति के कारण संभव हो सकी थी। इसके बिल्कुल अलग 1989 में बिना आपातकाल जैसी बैसाखी के गैर-कांग्रेसी विपक्ष ने अभूतपूर्व बहुमत से बनी राजीव गांधी सरकार को अपदस्थ करके सत्ता हासिल की। गठबंधन की यह अप्रत्याशित विजय विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व में चले भ्रष्टाचार उन्मूलन के आंदोलन के साथ-साथ उत्तर भारत की पिछड़ी जातियों के संगठित होकर कांग्रेस के अभिजात्य चरित्र के खिलाफ गोलबंद होने का भी परिणाम थी। चुनाव-परिणाम ने ग्रामीण क्षेत्रों में लोकप्रिय चौधरी देवी लाल को वी पी सिंह के समक्ष ही एक सशक्त नेता के रूप में स्थापित कर दिया था। सत्येन्द्र प्रकाश ने, जिनकी दर्जन भर से भी ज़्यादा रचनाएं पाठकों ने बहुत पसंद की हैं, भारतीय राजनीति के इस संक्रमण काल को खूंटा बनाकर यह लेख लिखा है जिसमें वह बताते हैं कि कैसे अंग्रेज़ी के अभिजात्यवाद के कारण प्रतिभाएं कुंठित होती हैं और कैसे उनके विद्यार्थी-काल में बदलते समय की आहट सुनाई दी।