राजेन्द्र भट्ट की कहानी अभी दो दिन पहले ही प्रकाशित हुई है. आम तौर पर हम एक ही लेखक की दूसरी रचना में कुछ गैप रखना चाहते हैं. हमने उनके सामने अपनी ये दुविधा राखी तो उन्होंने बताया कि एक फिल्म पर लिखा है जो पुरानी ना हो जाए. हमने लेख पढ़ा तो पाया कि उसमें फिल्म के अलावा भी जो है, वो बेशकीमती है. आइये, आप भी पढ़िए.












