समाज-एवं-राजनीति

Delhi Domestic Workers: An Invisible Workforce

This essay by Dr. Meenakshi Saxena offers a wide-angle view of the working conditions of domestic workers in Delhi. The subject of their rights and dignity remains under-reported in mainstream media, making this essay both timely and necessary. 

कांग्रेस से अघोषित लड़ाई में खुद ही सिमट गये विपक्षी दल

कांग्रेस को लेकर क्षेत्री दलों को होने वाली दुविधा अब बरसों पुरानी हो चली है. अटलबिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण अडवाणी की जोड़ी ने जब से हिंदी पट्टी के साथ गुजरात और महाराष्ट्र बल्कि बाद में कर्नाटक में भी अपनी स्थिति मज़बूत कर ली तो क्षेत्रीय दलों को कन्फ्यूज़न होने लगा कि उन्हें लड़ना किससे है. बाद के वर्षों में भाजपा की स्थिति और मज़बूत हुई तो कांग्रेस की तरफ झुके तो लेकिन तब असुरक्षा भी महसूस हुई कि कहीं हमें निगल ही ना ले. इसी पृष्ठभूमि में हाल ही के विधानसभा चुनावों के बाद वरिष्ठ पत्रकार राजकेश्वर सिंह का यह विश्लेषण प्रस्तुत है. 

कॉकरोच जनता पार्टी का ऑनलाइन संस्करण और आलसी विपक्ष

कॉकरोच जनता पार्टी का ऑनलाइन संस्करण और आलसी विपक्ष - भारत के विपक्षी दल एक नौजवान के ऑनलाइन मज़ाक को इतना सीरियसली क्यों ले रहे हैं? क्या कॉकरोच जनता पार्टी सचमुच कोई राजनीतिक पहल है या यह भी ऑनलाइन मज़ाक बनकर रह जाएगी? इन प्रश्नों के उत्तर खोजने का प्रयास किया गया है इस लेख में. 

पलट प्रवास से तेज हो सकता है ग्रामीण भारत का विकास

कोविड -19 के दौरान लाखों प्रवासी मजदूर लॉकडाउन के समय शहरों से पैदल, साइकिल या बसों से अपने गाँव लौटे। इसे रिवर्स माइग्रेशन या पलट प्रवास कहा गया। बाद में अर्थशास्त्रियों ने पाया कि यह केवल संकट की प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह भारत की सामाजिक-आर्थिक संरचना में एक नया रुझान बन रहा है। यदि सरकार और समाज सही नीतिगत समर्थन दें—जैसे ग्रामीण रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ—तो यह प्रवृत्ति ग्रामीण भारत के विकास का आधार बन सकती है। 

Manual of Perfect Citizens: A Satire

The satires are meant to be exaggerated as they forewarn us of the possible dangers. This satire by K.G. Sharma critiques how societies can package freedom into something hollow, turning autonomy into compliance.
 

क्या भारत बन सकता है एआई में सुपर पावर : संभावनाएँ एवं चुनौतियाँ

अभी हाल ही आपने इस वेब पत्रिका में डॉ. शैलेश शुक्ला एक लेख देखा होगा - डिजिटल थकान: क्या निरंतर कनेक्टिविटी हमें भीतर से खाली कर रही है? आज उन्हीं का हम दूसरा लेख प्रस्तुत कर रहे हैं जो भारत में ‘ए आई’ सुपर पॉवर बनने की संभावनाओं और इस रास्ते में आने वाली चुनौतियों की गहन पड़ताल कर रहा है. इस विषय पर हिंदी में इतना में इतने विस्तृत लेख संभवत: अभी बहुत ना लिखे गए हों. 

 

We are trying to create a platform where our readers will find a place to have their say on the subjects ranging from socio-political to culture and society. We do have our own views on politics and society but we expect friends from all shades-from moderate left to moderate right-to join the conversation. However, our only expectation would be that our contributors should have an abiding faith in the Constitution and in its basic tenets like freedom of speech, secularism and equality. We hope that this platform will continue to evolve and will help us understand the challenges of our fast changing times better and our role in these times.

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RaagDelhi: देश, समाज, संस्कृति और कला पर विचारों की संगत

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