कोविड -19 के दौरान लाखों प्रवासी मजदूर लॉकडाउन के समय शहरों से पैदल, साइकिल या बसों से अपने गाँव लौटे। इसे रिवर्स माइग्रेशन या पलट प्रवास कहा गया। बाद में अर्थशास्त्रियों ने पाया कि यह केवल संकट की प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह भारत की सामाजिक-आर्थिक संरचना में एक नया रुझान बन रहा है। यदि सरकार और समाज सही नीतिगत समर्थन दें—जैसे ग्रामीण रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ—तो यह प्रवृत्ति ग्रामीण भारत के विकास का आधार बन सकती है।












