ओंकार केडिया की यह क्षणिकाएं बहुत स्पष्ट हैं और एकदम 'डायरेक्ट हिट' करती हैं. कई दशक पहले जब जापानी काव्य शैली के 'हाइकू' का हिंदी कविता से परिचय हुआ था तो जल्द ही यह हिंदी कविता में भी स्थापित हो गया और इस तरह की शैली को 'क्षणिका' कहा जाने लगा. ओंकार को यह शैली बहुत प्रिय हैं और उन्होंने बहुत सी ऐसी छोटी-छोटी कवितायेँ लिखी हैं जो खूब सारगर्भित होती हैं.











