आजकल डॉ मधु कपूर के भाषा-दर्शन पर लेखों लिख रही हैं। इस कड़ी में आपने पिछले दिनों संवाद, भाषा और तत्त्वबोध, अस्तित्व, चेतना और भाषा की अद्भुत लीला : कश्मीर शैवागम, और शब्दहीनता अर्थहीनता का समीकरण = शून्यता, और दो शब्दों के बीच शून्य स्थान की अहमियत जैसे लेख पढ़े हैं। प्रस्तुत है भाषा-दर्शन पर लेखों की कड़ी में उनका अंतिम लेख!

.jpg)









