कानून और नैतिकता: अनन्त धड़कनों में स्पंदित न्याय
डॉ मधु कपूर की दार्शनिक लेखों की शृंखला अब नए आयाम तलाश रही है। इस बार का उनका लेख नैतिकता और कानून (Law and Morality) के अंतर संबंधों की पड़ताल करता दिख रहा है। हमने जब उनसे इस लेख के बारे में बताने को कहा तो उन्होंने यह बताया - "कानून और नैतिकता सतत प्रवाह में संवाद करते हैं—कभी टकराते हुए, तो कभी परस्पर प्रभावित होते हुए। जब अन्याय और विद्रूपता असहनीय हो उठती हैं, तब कठोर कानून लोहार की एक निर्णायक चोट की तरह वार करता है—एक ऐसा प्रहार, जो सौ धीमे आघातों से अधिक प्रभावशाली होता है। परंतु जब चोट गहरी हो जाती है और पीड़ा केवल दंड से नहीं मिटती, तब कानून की कठोरता को नैतिकता की करुणा से सींचकर एक संभावित पुल का निर्माण किया जाता है, जिससे समाज का आत्मीय पुनर्वासन संवेदना की ओर लौटने लगता है।"