“...किन्तु स्वाभाविक रूप से दोनों (ज्ञान और भक्ति) में गंभीर मतभेद हैं। जहाँ वैष्णव वेदान्ती यह मानते हैं कि परमेश्वर की प्राप्ति केवल भक्ति से ही संभव है ...वहीँ दूसरी ओर शंकर की ज्ञानपरक व्याख्या यह प्रतिपादित करती है कि मोक्ष की प्राप्ति केवल ज्ञान से ही हो सकती है”











