यह किसने दुनिया को युद्ध में धकेला है : योगेंद्र दत्त शर्मा का गीत
अपना प्रभुत्व बढ़ाने के लालच में अमेरिका द्वारा आरम्भ किया गया यह युद्ध इतना भयावह हो चला है कि इससे सिर्फ ईरान ही नहीं बल्कि किसी ना किसी रूप में दुनिया का हर देश नकारात्मक रूप से प्रभावित हो रहा है. ऐसे में बहुत स्वाभाविक है कि साहित्य और कला जगत के लोग इससे द्रवित होकर कुछ ना कुछ लिखेंगे, रचेंगे! गीतकार, कवि एवं उपन्यासकार योगेंद्र दत्त शर्मा हमारी वेबपत्रिका में बीच-बीच में अपना योगदान देते ही रहते हैं, इस बार उन्होंने युद्ध के विरुद्ध यह गीत भेजा है जो हम आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. हमें विश्वास है कि युद्ध विरोधी गीतों और कविताओं में यह गीत अपना विशिष्ट स्थान बनाएगा.
यह किसने दुनिया को युद्ध में धकेला है
योगेंद्र दत्त शर्मा
प्रश्नों की भीड़ लगी, मन हुआ अकेला है
सहमे हैं लोग यहां
यह कैसा मेला है !
स्वर है बेहद कातर, आंखों में दहशत है
इस सबसे हर कोई लग रहा असहमत है
यह किसने दुनिया को
युद्ध में धकेला है !
कौन है युयुत्सु यहां, युद्ध का खुमार किसे
चील, गिद्ध, कौओं से है इतना प्यार किसे
किस-किसकी करनी को
किस-किसने झेला है !
खलनायक कौन यहां, कौन महानायक है
कौन खुद परीक्षार्थी, खुद ही निर्णायक है
कौन है तमाशाई
किसका यह खेला है !
थे अच्छे-खासे दिन, कुछ सुहावना मौसम
लय, धुन, सुर-ताल सही, थी न बेसुरी सरगम
ऐसे में औचक ही
क्या हुआ झमेला है !
चीखें, चीत्कारें हैं, दृश्य हृदय-द्रावक हैं
रुंधी-रुंधी किलकारी, शव तमाम शावक हैं
है प्रसन्न अधिनायक
झूम रहा चेला है !
अमन-चैन लुप्त हुआ, है सुकून भी दुर्लभ
संकट सब पर आया; क्या जल, क्या थल, क्या नभ
भौंचक सब, यह अजीब
संकट की वेला है !
धुंधलाईं पगडंडी, है अदृश्य हर मंजिल
बस्ती में सन्नाटा, हो गई गुजर मुश्किल
व्याघ्र के शिकंजे में
गाय का तबेला है !
गलियों में, सड़कों पर पसरी खामोशी है
दर्शक-दीर्घाओं में छाई मदहोशी है
हम हैं बाजारों में
जेब में न धेला है !
एक सिरफिरा कोई मनमानी करता है
जब जो जी में आता, वही कर गुजरता है
विश्व को समझता वह
मिट्टी का ढेला है !
रोने भी दे न रहा, जबरा यों मार रहा
देता जो संरक्षण, वह बस लाचार रहा
ऐसे में कौन कहे
मौसम अलबेला है !

लेखक कवि और गीतकार हैं। कई लब्धप्रतिष्ठ पत्र-पत्रिकाओं में गीत-नवगीत, ग़ज़ल, कहानी, निबंध व आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। आकाशवाणी और दूरदर्शन से रचनाओं का प्रसारण; हाल ही में दो उपन्यास प्रकाशित हुए हैं जिनके बारे में आप यहाँ पढ़ सकते हैं।