कभी-कभी लगता है कि आज के भारतीय मध्यम-वर्ग ने अब वंचितों और आदिवासियों की तरफ से पूरी तरह से मुँह मोड़ लिया है। राजनीतिज्ञों की हम यानि मध्यम वर्ग कड़ी आलोचना करता रहता है (और उसमें कोई बुराई नहीं है) लेकिन राजनीतिज्ञ और या फिर कुछ गिने-चुने बुद्जीवी ही ऐसी जमात हैं जो कभी-कभार दलित-आदिवासियों की कोई चिंता करते हैं।












