हमारे यहाँ पिछले कुछ माह से निरंतर लिख रहे डॉ शैलेश शुक्ला ने मई के अंत में हिंदी पत्रकारिता के २०० वर्ष पूरे होने के अवसर पर हिन्दी पत्रकारिता के समक्ष चुनौतियाँ और उसके बदलते स्वरूप पर कुछ लेखों की श्रृंखला लिखने की पेशकश की जिसे हमने सहर्ष स्वीकार कर लिया। इस क्रम में उनका पहला लेख हिंदी पत्रकारिता का वैश्विक विस्तार और नई चुनौतियाँ आप कुछ दिन पहले पढ़ ही चुके हैं। आज का यह लेख उनके पिछले लेख का विस्तार ही है। इस लेख में भी उन्होंने पत्रकारिता के समक्ष आधुनिक तकनीक और संसाधनों की प्रचुर उपलब्धता के बावजूद आ रही चुनौतियों की चर्चा की है.









