सेमिनार से लौट कर मैंने बैग पटक कर कहा ‘सब बकवास ! इतनी बकवास कोई कैसे कर सकता है, वह भी दो घंटे लगातार?’ बकवास अर्थात अर्थहीन, असंगत वक्तृता, जिसका कोई सिर पैर नहीं था ! सिर भन्ना रहा था ! सोच ने करवट बदली ᅳ जब पूरा लेक्चर ही अर्थहीन था तो मुझे अर्थबोध कैसे हुआ कि ‘सब बकवास था !’











