अध्यात्म-एवं-दर्शन

Hanuman Mahaprabhu: the Merciful and Compassionate Guru

As we approach Hanuman Jayanti on Saturday, April 12th, we are delighted  to present an insightful piece by Tish Malhotra.

 

आखिर सुन्दरता ही दुनिया का त्राण करेगी !

सौंदर्यशास्त्र शृंखला में डॉ मधु कपूर के इस चौथे लेख में आप दोस्तोवस्की के इस प्रसिद्ध कथन की जांच करेंगे कि सौंदर्यबोध ही दुनिया को बचा सकता है। आज पूरी दुनिया में जिस तरह का नफरती माहौल छाया हुआ है, उसमें सौंदर्यबोध जैसी सुकोमल अनुभूति का ज़िक्र मात्र भी एकदम असहज सा लगता है। लेकिन यह भी सच है कि जब भी मनुष्यता को इस नफरती माहौल से निजात पानी होगी, तभी सौन्दर्यबोध जैसी अनुभूतियाँ अपने आप प्राथमिकता पा लेंगी। 
 

सुन्दर ही सत्य:सत्य ही सुन्दर - सौन्दर्यशास्त्र शृंखला का तीसरा लेख

सौंदर्यशास्त्र का तीसरा लेख सुंदर ही सत्य और सत्य ही सुंदर इस बात की जांच करता है कि 'सत्य' एवं 'सौन्दर्य' के बीच तालमेल कैसे किया जाए। प्रश्न यह भी है कि रसानुभूति का सत्य के साथ समायोजन कैसे किया जाए? फिर विज्ञान से जुड़े प्रश्न भी तो हैं। आइए, इन सभी प्रश्नों पर आप भी विचार कीजिए। 

 

अनहद राग रस - सौन्दर्यशास्त्र शृंखला का दूसरा लेख

दर्शनशास्त्र शृंखला का दूसरा लेख सौन्दर्यबोध कैसे होता है या रसानुभूति कैसे होती है - इस दार्शनिक प्रश्न पर भी विचार करता है। क्या हमारी भावनात्मक प्रवृत्ति ही वस्तु में सौंदर्य का संचार करती है या फिर वस्तु में अपना सौन्दर्य होता है। आपको ऐसे प्रश्नों का सीधा उत्तर मिले या नया मिले किन्तु ये लेख आपको ऐसे गूढ़ विषयों की गहराई तक ले जाएंगे और वहाँ पहुँच कर आप अपनी मति के अनुसार उस उत्तर तक पहुँच जाएंगे जो आपको जँचेगा। 

The Advent of Lord Sri Chaitanya Mahaprabhu - Holi Special

The festival is closely associated with Lord Krishna and Sri Radharani.

संवेदना और अभिव्यक्ति के अन्तराल में अनकहा सौंदर्य

डॉ मधु कपूर पिछले काफी समय से दर्शनशास्त्र की सघन दुनिया से हमारा परिचय करवा रही हैं। उन्होंने पिछले लगभग एक वर्ष दर्शनशास्त्र के विभिन्न आयामों के बारे में हमें इस जटिल विषय को सुबोधगम्य ढंग से समझाया है। हाल ही में दर्शनशास्त्र और भाषा पर उनकी सीरीज़ सम्पन्न हुई है। दर्शनशास्त्र की एक गली सौंदर्यशास्त्र की तरफ भी मुड़ती है। इस लेख के साथ डॉ मधु कपूर सौंदर्यशास्त्र को हमारे पाठकों के लिए सरल बनाने के लिए एक शृंखला प्रारम्भ कर रही हैं जिसका पहला लेख आप यहाँ पढ़ रहे हैं। 

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RaagDelhi: देश, समाज, संस्कृति और कला पर विचारों की संगत

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