वक्तृता अथवा भाषण देने की कला कोई साधारण गुण नहीं है और इसीलिए शायद दुर्लभ भी है। पिछले कुछ वर्षों में हमने अच्छे भाषण देने वाले आमतौर पर राजनीति में खूब देखे हैं। यह बात अलग है कि आम जनता के बीच बहुत लोकप्रिय वक्ता भी विश्वसनीयता के पैमाने पर संतोषजनक ऊँचाइयाँ भी नहीं छू पाते। वक्तृता पर चर्चा करते हुए वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार मनोहर नायक जिस तरह से हमें गाँधी जी की के बारे में बताते हैं, वह बहुत ही 'टचिंग' है और इसे पढने के बाद हम गाँधी जी के प्रति एक बार फिर श्रद्धानवत हो जाते हैं।












