अक्सर जब हम ज्ञान के बारे में बात करते हैं तो मन में यही आता है ना कि यहाँ किसी 'अंतिम सत्य' की बात हो रही है। लेकिन भारतीय दर्शन में यह बात नहीं है। दर्शन में ज्ञान 'सत्य' भी हो सकता है और 'मिथ्या' भी। हो सकता है हम भारतीय शायद instinctively इस बात को जानते हैं, तभी हम बहुत बार 'ज्ञान' के प्रति dismissive रहते हैं।











