अनीता गोयल अब इस वेब-पत्रिका के लिए नई रचनाकार नहीं रही हैं. यहाँ प्रकाशित उनकी दो कहानियां काफी चर्चित रही हैं. उनकी दोनों कविताएँ भी काफी पसंद की गईं थीं. आज की कहानी भी पहली कहानियों की तरह मानवीय रिश्तों की पड़ताल तो है ही, साथ ही यह कहानी महिला-सशक्तिकरण की भी है. हम इस कहानी के बारे में और कोई टिप्पणी इसलिए नहीं कर रहे कि आप स्वयं इस रचना के साथ अपनी साहित्यिक यात्रा करें और चाहें तो कमेंट बॉक्स में अपनी राय से अवगत कराएँ.











