प्रोफेसर राजकुमार जैन के इस लेख के पहले चार भागों में आप पढ़ चुके हैं कि किस प्रकार कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के स्थापना सम्मेलन में कांग्रेस के एजेंडा पर मज़दूरों और किसानों के हितों के सर्वोपरि रखने के प्रयास शुरू हो गए थे और कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के प्रथम सम्मेलन में मज़दूरों से संबंधित प्रस्ताव में किस तरह से बहुत से प्रगतिशील कदमों की सिफारिश की गई। सोशलिस्ट जहाँ कामगारों की ज़मीनी लड़ाई में आगे रहे है, वहीं आंदोलन के नये औजार और उसके वैचारिक पक्ष पर भी लीक से हटकर नये परिपेक्ष में मजदूरों के अधिकारों पर सजग करते रहे।












