सुभाष सेतिया की अलग मूड्स दो नई कविताएँ
सुभाष सेतिया की नई कविताएँ बिल्कुल अलग अलग मूड्स की हैं. ये दोनों कविताएँ बिलकुल अलग होते हुए भी सम्वेदना के स्तर पर कहीं ना कहीं एक ही तरह से झकझोरती हैं. अगर आप उनकी कविताओं में तारतम्यता ढूँढना चाहते हैं तो इस वेब पत्रिका में प्रकाशित उनकी पहले की दो कवितायेँ यहाँ और यहाँ देख सकते हैं.
सुभाष सेतिया की अलग मूड्स दो नई कविताएँ
राजा और प्रजा
हम कहेंगे
तुम सुनोगे
हम करेंगे
तुम सहोगे
हम उठेंगे
तुम झुकोगे
हम मारेंगे
तुम झेलोगे
हम मालिक
तुम नौकर
हम सत्ता
तुम सेवक
हम अभिमानी
तुम अनुगामी
साम हमीं हैं
दाम हमीं हैं
दंड हमीं हैं
भेद हमीं हैं
हमीं यंत्र हैं
हमीं तंत्र हैं
हम सागर
तुम दरिया
हम पर्वत
तुम धारा
तुम धरती
हम आसमान
तुम घायल
हम घातक
तुम मृदा
हम कलश
हम अजगर
तुम मीन
हम सबल
तुम क्षीण
हम संपन्न
तुम दीन
हम दाता
तुम याचक
हम सिंहासन
तुम आसन
हम सशक्त
तुम बेबस
तुम संतति
हम मात-पिता
हम हाकिम
तुम जनता
रात और दिन
दिन दौड़ता सूर्य चमक में
रात भीगती चंद्र दमक में
दिवस बीतता भाग भीड़ में
रात है रहती शांत नीड़ में
दिन है इच्छाओं का प्रांगण
रात मधुर सपनों का आँगन
दिन प्रकाश का विशद धरातल
रात है तम का गहरा सागर
दिवस कर्म का है माया वन
रात प्रशांति का भव्य भवन
दिन कर्म व श्रम का है रण
रात कल्पनाओं का मृग वन
धूप जलाती दिन में तन को
निशा का मौन सुहाता मन को
दिन चलता पहियों पर चढ़ कर
रात रेंगती सिसक सिसक कर
दिवस रात्रि में कहाँ है अंतर
दोनों ही गतिमान निरंतर
दिन का अस्त है निशा निमंत्रण
रात का अंत है प्रभा आमंत्रण
दिन की क्लांति रात है हरती
निशा कालिमा दिन में धुलती।

सुभाष सेतिया आकाशवाणी से अपर महानिदेशक(समाचार) पद से रिटायर । भारतीय सूचना सेवा (IIS) के अधिकारी के रूप में आकाशवाणी और दूरदर्शन में समाचार संपादन, प्रकाशन विभाग में आजकल. योजना और Employment News का संपादन, पत्रकारिता का अध्यापन । 10 पुस्तकों का प्रकाशन । आकाशवाणी के विशेष संवाददाता के रूप में कई देशों की यात्रा ।