जीवन के रंग : सुभाष सेतिया की नई कविता
सुभाष सेतिया की एक कविता आप पहले इस वेब पत्रिका में यहाँ पढ़ चुके हैं. आज की कविता उनकी पिछली कविता युद्ध- भूपति से बिलकुल भिन्न श्रेणी की है. जहाँ पिछली कविता सीधे-सीधे अपनी बात कहती थी, वहीँ आज की कविता सरल शब्दावली के होते हुए भी अपने में दार्शनिक तत्वों को समेटे हुए हैं. देखते हैं कि इस वेब-पत्रिका में दार्शनिक निबंधों की श्रृंखला चला रही डॉ मधु कपूर इस कविता पर क्या कोई टिप्पणी हमारे पाठकों के लिए लिख सकेंगे? फिलहाल तो आप इस कविता की गहराइयों में डूबकर जीवन के रंग देखिये.
जीवन के रंग
सुभाष सेतिया
तू तू है
मैं मैं हूँ
तुम क्षिति
मैं पाताल
तुम पूर्णता
मैं अंतराल
तुम कुसुम
मैं कंटक
तुम सुखद
मैं संकट
तुम सृष्टि
मैं प्रलय
तुम अर्जन
मैं निर्गम
तुम भाव
मैं तर्क
तुम विनय
मैं दर्प
तुम निश्चय
मैं भ्रांति
तुम शांति
मैं क्रांति
तुम गति
मैं विराम
तुम दक्षिण
मैं वाम
तुम शीतलता
मैं ताप
तुम वरद
मैं अभिशाप
तुम योगी
मैं भोगी
तुम औषध
मैं रोगी
तुम जलधारा
मैं पाषाण
तुम यात्रा
मैं विश्राम
तुम दर्पण
मैं छाया
तुम जगत
मैं माया
तुम आस्था
मैं संशय
तुम भाषा
मैं विषय
तुम ज्योति
मैं तिमिर
तुम वसंत
मैं शिशिर
तुम उच्च
मैं निम्न
तुम संपन्न
मैं विपन्न
तुम सरल
मैं विकट
विपरीत हैं
फिर भी निकट
जग के विविध प्रसंग
यही जीवन के रंग
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सुभाष सेतिया आकाशवाणी से अपर महानिदेशक(समाचार) पद से रिटायर । भारतीय सूचना सेवा (IIS) के अधिकारी के रूप में आकाशवाणी और दूरदर्शन में समाचार संपादन, प्रकाशन विभाग में आजकल. योजना और Employment News का संपादन, पत्रकारिता का अध्यापन । 10 पुस्तकों का प्रकाशन । आकाशवाणी के विशेष संवाददाता के रूप में कई देशों की यात्रा ।