इस सरकार ने मीडिया के पतन को सार्वजनिक कर दिया है और अब कुछ भी छिपा नहीं रहा। चिंता की बात ये है कि यदि सरकार बदल भी जाती है तो भविष्य की सरकारों को यह पहले से ही पता होगा कि मीडिया को कैसे मामूली से दबाव से ही झुकाया जा सकता है। मीडिया का दुरुपयोग ना हो, यह तो अब भविष्य की सरकारों के स्वयं के नैतिक बल पर ही निर्भर करेगा।












