हमारे लिए यह अत्यंत संतोष की बात है (और गर्व की भी) कि अजंता देव इस वेबपत्रिका के लिए अपनी बेहतरीन कविताएं लगातार देती रही हैं। कविताओं के अलावा उन्होंने अपने उपन्यास "खारिज लोग" का अंश हमें प्रकाशित करने को उपलब्ध कराया। हाल ही में हमने उनकी लघुकथा 'निष्णात समाज' भी प्रकाशित की है। इन कविताओं में वह समकालीन मुद्दों से सीधा सामना करती लग रही हैं। एक बार अजंता देव ने अपने पत्र में हमें लिखा था, "ये कविताएं स्वयं से भी संवाद हैं। कविता के अलावा मेरा संवाद और भला कैसे होगा।" यही ध्यान में रखते हुए आप इन कविताओं को पढ़ें।


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