ट्रम्प और नेतन्याहू के शैतानी सपने कहीं दुनिया को ना ले डूबें - क्या ये दोनों विश्व को कहीं आणविक युद्ध की ओर तो नहीं धकेल रहे ? ट्रम्प के रोज़ बदलते ब्यानों के बीच यह समझना मुश्किल है कि वह सचमुच इस युद्ध आ अंत चाहता है या उसके मन में कुछ ऐसा कर गुजरने की है ज्जिसे आने वाली नस्लें भी याद रखें.









