सावन का स्वागत - सुभाष सेतिया की कविता
इधर सावन निकला जा रहा है और हमें सुभाष सेतिया की यह कविता प्राप्त हुई है, इसलिए हमें इसे जल्द प्रकाशित कर रहे हैं। जल्द इस मायने में कि हमने कल ही कविताएँ प्रकाशित की हैं और हम कविताएँ कुछ गैप के बाद ही प्रकाशित करते हैं लेकिन इस बार हम इस नियम में ढील दे रहे हैं क्योंकि जैसा कि हमने कहा, सावन निकला जा रहा है. यह कविता भारतीय मानसून के सांस्कृतिक और प्राकृतिक आयामों का एक सुन्दर चित्रण है और सावन के बहुआयामी अनुभवों — उल्लास, रोमांच, कठिनाई और स्नेहासिक्त आस्था — को एक सहज शैली में प्रस्तुत करती है। इसे आप ऋतु‑अनुभव का सांस्कृतिक दस्तावेज़ भी मान सकते हैं। अपनी इन्हीं खूबियों के चलते इस पत्रिका के मिजाज़ से अलग होते हुए भी इस कविता ने यहाँ अपनी जगह बनाई है.
सावन का स्वागत - सुभाष सेतिया की कविता
सावन आ तेरा स्वागत है
बादल गरजें या न गरजें
बरस पड़ें या यों ही जाएँ
आहट से मन कंपित होता
दर्शन से मन गा गा उठता
बूँद गिरे तन पुलकित होता
झमझम से जग हर्षित होता!
वर्षा रानी बड़ी सुहानी
मेघदूत आया बन दानी
सब ऋतुओं में बडी सयानी
पृथ्वी की तुम प्यास बुझाती
नदियों की तुम गति बढ़ाती
ताल तलैया सरोवर सब में
नवजीवन की लहर जगाती
सागर बीच करो तुम नर्तन
रोमांचित हो उठता तन मन!
निर्धन लेकिन तुम्हें कोसते
घरों के छप्पर लगें टपकते
गाँवों की गलियों में फिसलन
पर किसान का उछल उठा मन
खेतों की उर्वरा है बढ़ती
फूलों पर मुस्कान छलकती!
झूलों का मेला रंगीला
पाँव थिरकते
ढोल हैं बजते
गीत गूँजते
हृदय मचलते
इंद्रधनुष हर कोई निहारे
मोर नाचता पंख पसारे!
अतिवृष्टि की करुण कहानी
चहुं ओर पानी ही पानी
मार्ग टूटते
खेत डूबते
घर है गिरते
गिरि दरकते
नदियां उछल उछल कर बहतीं
राह की हर बाधा समेटतीं
उन सबको तू सबक सिखाती
जो प्रकृति से खेल खेलते
उनको भी तू दंडित करती
जो जल स्रोतों को छेड़ते!
वन आँचल को सिंचित करती
मैदानों को हरित बनाती
तेरी दयाशीलता तक कर
हम सब मानव तुझे बुलाते
जब भी रूठ जाए तू हमसे
अनुष्ठान कर तुझे मनाते
तेरी सनातन जलराशि से
धरती भरती
सृष्टि पलती
जीव जगत की
लीला चलती!
जब कम हो या न हो वर्षा
हाहाकार कर उठती दुनिया
भूख प्यास से जर्जर जन जन
तुम्हें पुकारते
हाथ जोड़ते
इंद्र देव की
पूजा करते
यही निवेदन
यही आवेदन
बिन तेरे रह न सकते हम
हर सावन में आ जाना तुम
********

सुभाष सेतिया आकाशवाणी से अपर महानिदेशक(समाचार) पद से रिटायर। भारतीय सूचना सेवा (IIS) के अधिकारी के रूप में आकाशवाणी और दूरदर्शन में समाचार संपादन, प्रकाशन विभाग में आजकल. योजना और Employment News का संपादन, पत्रकारिता का अध्यापन। दस पुस्तकों का प्रकाशन । आकाशवाणी के विशेष संवाददाता के रूप में कई देशों की यात्रा।