मनोहर नायक का इस बार का लेख एक ऐसे विषय पर है जिस पर दुनिया की हर भाषा में संभवत: सबसे अधिक लिखा गया होगा। यदि आपने सोचा कि अच्छा, आज का उनका लेख प्यार/रोमांस और मुहब्बतों पर है तो आप लगभग ठीक हैं किन्तु पूरी तरह ठीक नहीं क्योंकि उनका यह लेख चाँद पर है। क्या 'प्यार-मुहब्बत' की कोई बात चाँद के बिना पूरी हो सकती है? अभी कुछ ही रोज़ पहले पौष की पूर्णिमा के चाँद को निहारते-निहारते मनोहर नायक का मन कहाँ-कहाँ भटका, यह जानने के लिए इस निबंध को पढ़िए।











