आकाशवाणी से संयुक्त निदेशक पद से सेवानिवृत्त राजेन्द्र उपाध्याय के अब तक दर्जन भर कविता संग्रह और करीब तीन दर्जन अन्य पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। 1983 में अपने पहले कविता-संग्रह ‘सिर्फ पेड़ ही नहीं कटते हैं’ से चर्चा में आए राजेन्द्र उपाध्याय हिन्दी के सर्वाधिक प्रतिष्ठित कवि अज्ञेय के प्रिय शिष्यों में से एक थे। हिन्दी अकादमी दिल्ली की ओर से इन्हें दो बार साहित्यिक कृति पुरस्कार मिला है। साहित्य अकादमी की ओर से राजेन्द्र उपाध्याय ने शारजाह अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला में काव्य पाठ किया। न्यूयॉर्क, जोहान्सबर्ग और मौरिशियस में विश्व हिन्दी सम्मेलन में शिरकत की।






