सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताओं के बहाने राजेन्द्र भट्ट ने इस लेख में यह सिफ़ारिश की है कि कविताओं को पढ़ते-गुनते समय अगर आप अपना बुद्धिजीवी और अति-गंभीर होने का आग्रह छोड़ कर समालोचना करेंगे तो इस बात की संभावना बढ़ जाएगी आप कविताओं में छिपा उल्लास और जीवंतता करीब से महसूस कर सकेंगे।











