हिलाल अहमद 'आतिफ' की तीन कविताएं
हिलाल अहमद 'आतिफ' हमारी वेब पत्रिका के लिए ज़रूर नए हैं किन्तु अकादमिक क्षेत्र में राजनीतिशास्त्र के व्याख्याता के तौर पर उनकी विशिष्ट पहचान है। इतना ही नहीं, वह अपनी संवेदनशील एवं पाठक को विचार की अतल गहराइयों तक ले जाने वाली कविताएँ एवं नज़्में लिखने के लिए भी पहचाने जाते हैं और 'शब्दांकन' सहित कई अन्य महत्वपूर्ण मंचों पर उनकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। नीचे हम उनकी तीन कविताएँ दे रहे हैं जो जीवन के कुछ बुनियादी और शाश्वत प्रश्नों से संवाद करती हैं।
अंधेरा, उजाला नहीं है
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अंधेरा,
कभी काली घटा सा
मनोहर, सुखद, संभावित,
और कभी
काली रात सा
अकेला, भयावह, अनिश्चित।
अंधेरा,
डराता है, लुभाता है, रोकता है,
आभास देता है,
समय के ठहराव का।
अंधेरा, अंधेरा ही है,
भ्रम है, धोखा है, आडंबर है,
क्योंकि
अंधेरा, उजाला नहीं है।
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दर्द ए दिल कुछ नहीं, कुछ भी तो नहीं!
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दर्द ए दिल, कुछ नहीं,
बोसीदा इमारत है,
बिखरे हुए पत्थर हैं, बेहिस वीराना है।
दर्द ए दिल, कुछ नहीं,
बेचैन मंज़र है,
उजड़ा हुआ गुलशन है, रोता हुआ माली है।
दर्द ए दिल, कुछ नहीं,
अधूरा फ़साना है,
बेमानी दास्तां है, मायूस तराना है।
दर्द ए दिल कुछ नहीं,
कुछ भी तो नहीं!
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मिटना, मिटाना संभव नहीं!
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मिटना,
मिट जाना,
अलिखित,
अनुपस्थित हो जाना।
खोना,
खो जाना,
ओझल,
विलुप्त हो जाना।
कुछ नहीं, बस,
निरर्थक, निर्मूल,
निराश, हताश जिज्ञासा है।
मिटना,
स्वनिर्मित सत्य है।
अलिखित होना,
अंकित प्रत्यय है।
अनुपस्थित होना,
प्रस्तुत अदृश्य है।
विलुप्त होना,
नव अतिमूल्य है।
मिटना, मिटाना
कुछ नहीं, बस,
अलिपिबद्ध,
अकल्पनीय,
अनैच्छिक,
अतितोन्मुख,
हस्ताक्षर हैं।

हिलाल अहमद, क्रिया यूनिवर्सिटी, श्रीसिटी (चेन्नई के पास लेकिन आंध्र प्रदेश) में राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर हैं। वे पॉलिटिकल इस्लाम, इंडियन डेमोक्रेसी और दक्षिण एशिया मे प्रतीकों की राजनीति पर पिछले तीन दशकों से शोध कर रहे है। उनकी प्रकाशित पुस्तकें है: 'मुस्लिम पॉलिटिकल डिस्कोर्स इन पोस्ट-कोलोनियल इंडिया: मॉन्यूमेंट्स, मेमोरी, कॉन्टेस्टेशन ' (रूटलेज 2014/2026) ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ द प्रेजेंट: मुस्लिम्स इन न्यू इंडिया (पेंगुइन, 2024), अल्लाह नाम की सियासत (हिन्दी में, सेतु प्रकाशन, 2023), सियासी मुस्लिम्स : ए स्टोरी ऑफ़ पॉलिटिकल इस्लाम इन इंडिया (पेंगुइन-रैंडम हाउस, नई दिल्ली, 2019) और डेमोक्रेटिक अकोमोडेशन्स: माइनॉरिटीज़ इन कंटेंपररी इंडिया (पीटर आर डिसूज़ा और संजीर आलम के साथ, ब्लूम्सबरी, 2019), कम्पैनियन टू इंडियन डेमोक्रेसी : रेजिलिएंस, फ्रैजिलिटी, एम्बिवेलेंस (पीटर आर डिसूजा और संजीर आलम रूटलेज, 2021), रीथिंकिंग मुस्लिम पर्सनल लॉ : इश्यूज, डिबेट्स एंड रिफॉर्म्स (रूटलेज, 2022) और सुदीप्ता कविराज : (हिंदी में, सेतु प्रकाशन, 2023)। हिलाल अहमद, ‘आतिफ’ के नाम से कविताएं और नज़में लिखते हैं। वे इन दिनों अपने पहले कविता संग्रह, ‘ये आतिफ कौन है?’ पर काम कर रहे है।