बिना किसी पूर्व-चेतावनी के हुए लॉक-डाउन ने देश के बड़े शहरों में रह रहे दिहाड़ी मज़दूरों को जिस तरह अचानक बेघर कर दिया और उन्हें जिन हालातों में पैदल ही सैंकड़ों मील चलकर अपने घरों को लौटना पड़ा, उससे मध्यमवर्ग के कुछ संवेदनशील लोगों को एक किस्म के अपराध-भाव से भर दिया।











