लंबे समय तक सरकारी प्रचार माध्यमों से जुड़े रहने के पश्चात पिछले कई वर्षों से स्वतंत्र लेखन करते हैं। इनकी प्रकाशित कृतियों में ‘त्रासदी -नारी और दलित उत्पीड़न के शास्त्रीय आख्यान’, ‘कब सुधरेगी वाल्मीकियों की हालत’ और ‘कहां हैं ईश्वर के हस्ताक्षर’ (कविता संग्रह) विशेष चर्चित रही हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख, कविताएं एवं कहानियाँ प्रकाशित होती रही हैं। आजकल जयपुर में रहते हैं। फोन : 8559841747






