दिल्ली विश्वविद्यालय के पी.जी.डी.ए.वी. कॉलेज (सांध्य) में कार्यरत प्रो. आशा रानी नारीवादी चेतना की प्रखर प्रवक्ता हैं। नारी विमर्श पर उनकी ‘स्त्री विमर्श की उलझनें’, ‘हिंदी स्त्री लेखन’ और ‘स्त्री साहित्य का सौंदर्य शास्त्र’ जैसी महत्वपूर्ण पुस्तकें आईं हैं। साथ ही ‘भारत का बदलता परिदृश्य और हिंदी साहित्य की भूमिका’ एवं ‘हिन्दी शोध:स्वरूप और संभावना’ जैसी शोधपरक पुस्तकों ने हिन्दी के शैक्षणिक जगत में विशिष्ट स्थान बनाया है। इन चर्चित पुस्तकों के साथ-साथ हिन्दी की विभिन्न पत्रिकाओं व पुस्तकों में उनके 60 के करीब आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। वह दो वर्ष तक दिल्ली विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल की सदस्य रहीं और उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय की अनेक समितियों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने लगभग तीन दशक के शैक्षणिक कैरियर में उन्हें कई सम्मान भी प्राप्त हुए हैं। उनके निर्देशन में दिल्ली विश्वविद्यालय से एक शोधार्थी को पीएचडी की उपाधि प्राप्त हो चुकी है और अनेक शोधार्थी उनके मार्गदर्शन में अपना शोधकार्य कर रहे हैं।





